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मंगलवार, 20 नवंबर 2007

व्यक्तित्व विकास

लाभदायक है पढ़ने की आदत

पढ़ने की आदत महिला, पुरुष, युवा, किशोर, प्रौढ़, वृद्ध यानी हर उम्र के लोगों के लिए विभिन्न प्रकार से उपयोगी सिद्ध होती है। नौकरी-व्यवसाय ही नहीं जीवन के हर क्षेत्र में यह पढ़ने की आदत कम या अधिक काम ही आती है। एक आम उपभेक्ता के नाते भी पढ़ने और पढ़ते रहने की आदत बहुत काम आती है। पढ़ने और मनन करने की आदत के कारण ही अनगिनत लोग मशहूर लेखक, पत्रकार आदि सृजनशील व्यक्ति बनाया है।

अनगिनत लोग ऐसे हें जिन्हें सुबह जल्दी अखबार पढ़ने को न मिले तो उनकी बेचैनी और परेशानी देखने योग्य होती है। तमाम टीवी समाचार चैनलों और इन्टरनेट के निरन्तर बढ़ते उपयोग के बावजूद दुनिया भर के छोटे-बड़े समाचारों से अवगत होना बहुत आसान हो गया है। परन्तु अखबार पढ़ने का अपना अलग आनन्द है। एक अलग शौक है। अपने आस-पास और देश-विदेश की खबरें, जानकारी, सूचना आदि जिस प्रकार एक अखबार से हमें मिलते हैं वैसे किसी अन्य माध्यम से नहीं मिल पाते। त्वरित व सीधे समाचार-विचार प्रसारण की दृष्टि से भले ही टीवी का अपना विशेष महत्व है पर वह अनेक दृष्टियों से अखबार की जगह नहीं ले सकता। अखबार पढ़ने का एक विशेष सुख होता है।

हमारे यहां पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अखबार पढ़ने के प्रति कम रुझान देखा जाता है। कमोवेश यही हाल हमारी नयी पीढ़ी का भी है। पढ़ने का अवसर मिलने पर वे फिल्म-टीवी, जीवन शैली या महिलाओं सम्बन्धी सामग्री पढ़ने का ही प्रमुखता देते हैं। महिलाओं का सुबह का समय काफी व्यस्तता भरा होता है। चाय, नाश्ता, खाना आदि बनाना, बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना, उसके बाद अन्य कामों के साथ-साथ दोपहर और शाम या रात की तैयारी करना। जिन घरों में नौकरानी होती है या कामवाली आती है वहां कुछ सुविधा मिल जाती है। पर बचे हुए समय का सही उपयोग नहीं हो पाता है। रात का काफी समय पिछले कुछ वर्षों से सास-बहू या ऐसे ही अन्य टीवी धारावाहिकों की भैंट चढ़ जाता है। पढ़ने का समय ही कहां बचता है। फिर भी ऐसी अनेक महिलाएं हैं जो अपनी व्यस्त दिनचर्या में से भी पढ़ने का सुख पाने के लिए थोड़ा-बहुत समय अवश्य निकाल लेती हैं।

प्रायः अधिकांश महिलाएं पढ़ने के मामले में यही शिकायत करती हैं कि क्या करें, पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता! कुछ महिलाओं का कहना है कि रोज अखबार पढ़कर ही हमें आखिर हासिल क्या होना है? हमें कौन से कम्पटीशन में बैठना है या किसी परीक्षा की तैयारी करनी है! सुबह से शाम तक घर-बाहर के काम-काज में खटना है। जबकि घरेलू महिलाओं के लिए अखबार पढ़ना भी काफी उपयोगी सिद्ध होता है। घरेलू महिलाओं को कामकाजी महिलाओं की अपेक्षा कहीं अधिक समय घर में ही गुजारना पड़ता है। बाकी दुनिया से उनका सम्बन्ध अखबार, पत्रिकाओं, टीवी, रेडियो आदि से ही जुड़ा रह सकता है। अपने आसपास की घटनाओं के साथ-साथ देश-विदेश की घटनाओं से अवगत होना हमें जागरूक और एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है।

संयुक्त परिवारों के अभाव में घरेलू महिला आज पहले की अपेक्षा कम सुरक्षित हैं। ठग, उठाईगीर, चोर और अन्य
असामाजिक तत्व या अपराधी आज पहले की अपेक्षा अधिक सक्रिय हैं। वे अपना उल्लू सीधा करने के लिए
तरह-तरह की नयी-नयी तरकीबें आजमाते रहते हैं। लगभग रोज ही अखबारों में इस प्रकार की घटनाओं के
समाचार संक्षेप में या विस्तार से उन असामाजिक तत्वों द्वारा अपनाए गये तरीकों की जानकारी के साथ छपते रहते हैं। ऐसे समाचार घरेलू महिलाओं को जागरूक बनाने के साथ-साथ सावधान भी करते हैं।

जरूरी नहीं कि कोई सारे काम छोड़कर सुबह-सुबह अखबार लेकर बैठ जाए। यदि ऐसा किया जाए तो पूरे परिवार
की दिनचर्या ही बदल जाएगी और अनेक प्रकार की परेशानियां सामने आ खड़ी होंगी। सब अस्तव्यस्त हो जाएगा।
अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां निभते हुए प्रतिदिन कुछ समय अखबार, पत्रिकाएं, अच्छी उपयोगी पुस्तकें पढ़ने निकालना एक अच्छी आदत बन सकती है। इसे अपनी दिनचर्या में मामूली फेरबदल करके असानी से हासिल किया जा सकता है।

यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि बहुत पढ़ लिए और अब पढ़ने में समय क्यों बरबाद करे। ज्यादा पढ़कर करना भी क्या है! अनेक महिलाएं अखबार-पत्रिकाओं में विशेष रूप से भविष्य फल, फैशन, फिल्म-टीवी, सौंदर्य, व्यंजन विधियां, कविता-कहानी आदि विविध सामग्री पढ़ने तक ही सीमित रहती हैं। एक अन्य आकर्षण होता है-सेल या डिस्काउंट के विज्ञापनों का। हालांकि यह भी ग्राहकों को मूर्ख बनाने के चालाकी भरे तरीके हैं। सामान्य ज्ञान, अपने आसपास की छोटी-बड़ी घटनाओं की जानकारी, देश-विदेश की खबरें, फीचर, लेख आदि के साथ-साथ अन्य सामयिक सामग्री की प्रायः अनदेखी की जाती है। सामान्य ज्ञान के अभाव में प्रायः चार लोगों के बीच नजरें चुरानी पड़ती हैं या गलत जानकारी प्रस्तुत करने पर मजाक का पात्र भी बनना पड़ता है।

अनेक क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के बराबर हैं और कुछ क्षेत्रों में उनसे भी आगे हैं। सामान्य ज्ञान, अपने आस-पास के परिवेश और घटनाक्रम से शिक्षित होने पर भी पिछड़ी हुई हैं। सामाजिक विषयों पर चर्चा करना उन्हें प्रायः जमता नहीं है। राजनीति, खेल, व्यवसाय, अर्थ, तकनीक, दूरसंचार, स्वास्थ्य, विभिन्न गतिविधियों आदि के बारे में जानने के प्रति रुचि के अभाव के कारण उनका दायरा सौदर्य, पाक कला, फिल्म-टीवी, फैशन, गृहसज्जा, भविष्य फल आदि तक ही सीमित होकर रह जाता है। सामाजिक-आथिक मुद्दों के बारे में उन्हें तनिक भी जानकारी नहीं हो पाती।

पढ़ने की आदत महिला, पुरुष, युवा, किशोर, प्रौढ़, वृद्ध यानी हर उम्र के लोगों के लिए विभिन्न प्रकार से उपयोगी सिद्ध होती है। नौकरी-व्यवसाय ही नहीं जीवन के हर क्षेत्र में यह पढ़ने की आदत कम या अधिक काम ही आती है। एक आम उपभेक्ता के नाते भी पढ़ने और पढ़ते रहने की आदत बहुत काम आती है। पढ़ने और मनन करने की आदत के कारण ही अनगिनत लोग मशहूर लेखक, पत्रकार आदि सृजनशील व्यक्ति बनाया है। देश में तमाम पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं, इन्टरनेट पर अनेक पोर्टल हैं जिन्हें नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए विविध स्तरीय सामग्री की आवश्यकता बनी रहती है। पढ़ते-पढ़ते लिखने को प्रेरित होकर अनेक महिला-पुरुष लेखक बन गये और वे घर बैठे पर्याप्त धन और नाम भी कमा रहे हैं। बिना पूंजी लगाए, बिना कार्यालय या वर्कशाॅप खोले वे अपना काम अपनी सुविधा के अनुसार कर रहे हैं। इस प्रकार के कार्य से जहां सृजनशीलता के साथ आत्मसन्तुष्टि सम्मान तो मिलता ही है, यह धन की प्राप्ति का जरिया भी बन जाता है। यही नहीं कैरियर की दृष्टि से भी पढ़ने-लिखने की आदत बहुत उपयोगी सिद्ध होती है।
टी.सी. चन्दर/www.prabhasakshi.com


ईमानदारी को बनाएं सफलता का आधार
ईमानदारी की राह में कुछ कष्ट-परेशानियां तो आते हैं पर चरित्र की तुलना में ये गौण हैं। व्यक्ति की ईमानदारी उसके लिए स्वयं मार्गदर्शक बनती है। उस व्यक्ति के लिए सिफारिश या परिचय की आवश्यकता नहीं होती। जो कहते हैं कि ईमानदारी का जमाना नहीं रहा, दरअसल वे ईमानदारी और उसके अनमोल गुणों कों पहचानते ही नहीं हैं।

ऐसे अनगिनत लोग हैं जो थोड़ा या कुछ अधिक हासिल करने की खातिर अच्छे मानवीय गुणों की बलि दे चढ़ा देते हैं, भले ही इसका उन्हैं अस्थाई लाभ मिले। अपने पेशे या कार्य क्षेत्र के जानकार या विशेषज्ञ कहे जाने वाले तमाम लोगों में से ऐसे लोगों कों उंगलियों पर गिना जा सकता है जिनमें सहज मानवीय गुण हों, जिनका चरित्र उनके कार्यक्षेत्र से ऊपर हो, ईमानदारी उनका प्रथम परिचय हो। वे अपने सिद्धान्तों को विभिन्न सांसारिक सुख-सुविधाओं -वस्तु-उपकरणों से बहुत ऊपर मानते हों। ऐसे लोग अपने क्षेत्र, कार्यालय, विभाग, प्रतिष्ठान या कार्यक्षेत्र ही नहीं अपने परिवार का भी सम्मान बढ़ाते हैं और उसे एक अलग और अच्छी पहचान देते हैं।

चालाक, तिकड़मी, झूठे, मक्कार,, बेईमान, धोखेबाज, जालसाज, घमंडी, ठग आदि की श्रेणी के लोगों की कमी नहीं है। ऐसे लोग हर काल में कमोवेश रहे हैं, यह जानते हुए भी कि वे जो कुछ कर रहे हैं वह ठीक नहीं है। उनके किए हर अनुचित कार्य का दुष्पतिणाम कम या अधिक परिमाण में स्वयं उनको, परिवार, समाज, कार्यालय, व्यवसाय, प्रतिष्ठान, शहर, प्रांत, देश या मानवता को भुगतना पड़ता है। दाग रहित चरित्र वाले, अपने सिद्धान्तों पर निडर होकर चलने वाले और प्रलोभनों से बचकर चलने वाले लोगों को हर जगह सम्मान मिलता है, दुनिया उन्हैं रास्ता देती है, लोग उन्हैं लम्बे समय तक याद रखतए हैं और उनकी ख्याति निरन्तर नयी दूरियां तय करती है।

ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जिनका कारोबार झूठ, बेईमानी, धोखाधड़ी, चालाकी, तिकड़म और मूर्ख बनाने से ही कुछ सीमा तक या पूरी तक चलता है। ये लोग स्वयं को भले ही धनाड्य, प्रभावशाली, प्रतिष्ठित, दानदाता, सुख-सुविधा सम्पन्न आदि मानते हो पर असलियत वे स्वयं और उनका ईश्वर दोनों भलीभांति जानते हैं। वास्तविकता यह है कि उनसे अपना स्वार्थ साधने वाले लोग भी उनका हृदय से सम्मान नहीं करते। वे ढहते हुए एक रेत के महल पर खड़े हुए हैं। उन्हैं इस बात का सदा भय रहता है कि अनुचित ढंग से कमाए हुए धन की कहीं जांच न शुरू हो जाए और लोगों के सामने कहीं उनका वास्तविक रूप न आ जाए। ऐसे अनेक उदाहरण लोगों के सामने आते रहते हैं जिनसे वे उन कथित सम्मानित लोगों का असली चेहरा देख लेते हैं। फिर भी धूर्त और बेईमान लोग अपने सम्मानित होने का भ्रम पाले रहते हैं।

दूसरी ओर निर्मल हृदय, सच्चरित्र, ईमानदार और खुली किताब की तरह रहने वाले लोग अपने समाज, सहयोगियों, परिवार, कार्यस्थल, प्रतिष्ठान आदि के लिए गौरव का विषय होते हैं। वे निर्भय होकर अपना काम करते हैं और निश्चिंत होकर गहरी नींद सोते हैं। अपने आप से वे अपराध बोध से ग्रस्त नहीं होते। उनका दुहरा चरित्र नहीं होता, अभाव उन्हैं विचलित नहीं कर पाते और उन्हैं विभिन्न भौतिक वस्तुओं की कमी नहीं अखरती। पारदर्दर्शी जीवन जीने वाले ऐसे निष्कलंक लोगों को अपनी किसी वस्तु के चोरी हो जाने का कभी भय नहीं होता क्योंकि जो कुछ सम्पदा उनके पास है उसे कोई चुरा नहीं सकता। कोई भय या प्रलोभन उन्हैं अपने मार्ग से हटा नहीं सकता। देर-सबेर सफलता, ख्याति, लोगों का स्नेह और शुभकामनाएं व सुख उन्हैं ही मिलते हैं।

आज विशेष रूप से युवाओं में यह बात अपनी पैठ बना रही है कि अब ईमानदारी का जमाना नहीं रहा। हर जगह बेईमान और बेईमानी का बोलबाला है। सब धन के बल पर या शार्टकट से मिल जाता है। वे अपने आसपास मौजूद अनगिनत सुविधासम्पन्न लोगों को देखकर ऐसा भ्रम पाल लेते हैं। ऐसे में शिक्षित, विचारशील, कर्तव्यनिष्ठ और समाज व देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने वाले लोगों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। युवाओं को यह समझाना जरूरी है कि बेईमानी से अर्जित उपलब्धियां कभी स्थाई नहीं होतीं, यही नहीं ऐसी उपलधियां अपने साथ तमाम परेशानियां और असम्मानक स्थितियां या उनकी सम्भावना साथ लेकर आती हैं।

यह सही है कि आज अनगिनत लोग बेईमानी के बल पर सुख-सफलता का आनन्द दे रहे हैं पर इस अल्पजीवी सुख का अन्त अन्ततः दुःख और प’चाताप के रूप में ही होता है। यह कितने आश्चर्य की बात है कि बेईमान अधिकारी या मालिक अपने अधीनस्थ या कर्मचारी में ईमानदारी, सच्चरित्रता, कर्तव्य परायणता आदि सदगुणों को अनिवार्य रूप में चाहते हैं। वे भी जानते हैं कि ईमानदारी एक प्रमुख मानवीय गुण है और बेईमानी अल्पजीवी होती है।

ईमानदारी की राह में कुछ कष्ट-परेशानियां तो आते हैं पर चरित्र की तुलना में ये गौण हैं। व्यक्ति की ईमानदारी उसके लिए स्वयं मार्गदर्शक बनती है। उस व्यक्ति के लिए सिफारिश या परिचय की आवश्यकता नहीं होती। जो कहते हैं कि ईमानदारी का जमाना नहीं रहा, दरअसल वे ईमानदारी और उसके अनमोल गुणों कों पहचानते ही नहीं हैं। ईमानदारी केवल रुपये-पैसे की नहीं होती। ईमानदारी का क्षेत्र बहुत व्यापक होता है और यह स्वयं में एक व्यापक अर्थ समेटे हुए होती है। यह व्यक्ति के आत्मसम्मान और आत्मवि’वास की सर्वश्रेष्ठ रक्षक होती है।

लगभग हर क्षेत्र में ईमानदारी एक भारी शब्द है जिसका हमेशा महत्व तथा सम्मान रहा है और रहेगा। ईमानदार, धैर्यवान, परिश्रमी, उत्साही, और व्यवहारकुशल व्यक्ति को आगे बढ़ने से, सफल होने से और अपना लक्ष्य पाने से कोई रोक नहीं सकता। यह ध्यान रखना चाहिए कि बेईमानी, धोखाधड़ी, छल-कपट आदि का एक न एक दिन भंडाफोड़ अवश्य होता है उस घाटे की स्थिति की क्षतिपूर्ति किसी तरह सम्भव नहीं है। ऐसे में चार दिनों की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली बात निर्विवाद रूप से सामने आती है।
टी.सी. चन्दर/www.prabhasakshi.com
लक्ष्य प्राप्ति के लिए जरूरी है लगन

एकाग्रता और लगन की भूमिका लक्ष्य प्राप्ति में बहुत
महत्वपूर्ण होती है। इनके अभाव में पिछड़ जाएंगे।
मन को भटकने से रोकने और सही दिशा में
लगाए
रखने का प्रयास जारी रहना ही
यह सभी जानते हैं कि हर सफल व्यक्ति को सफलता किसी जादू के डंडे से नहीं मिली है। सफल होने के लिए निरंतर मेहनत करनी पड़ती है। इसके साथ ही धैर्य, लगन, आत्मविश्वास, उत्साह, समय का सदुपयोग, पूरी क्षमता, समर्पण, समय और परिस्थिति के अनुसार कार्य, शीघ्र निर्णय की क्षमता, साधारण मानवीय गुण आदि का होना भी आवश्यक है। इन बातों पर ध्यान देकर अपनाने से सफलता और लक्ष्य प्राप्ति की राह आसान हो जाती है।

आपकी रूचि जिस क्षेत्र में है उसी में आगे बढ़ने से आप अपनी क्षमताओं का सही उपयोग कर पायेंगे। पर आज के भरी प्रतिस्पर्द्धा के समय में अपने चुने क्षेत्र के मिलते-जुलते विकल्प जरूर रखना चाहिए। आवश्यक हो तो इस मामले में अपने परिचित किसी अनुभवी योग्य व्यक्ति या संस्था से सलाह भी ली जा सकती है। यदि आप अपनी क्षमताओं का पूरे उत्साह के साथ उपयोग करेंगे तो आपको निश्चय ही विस्मयकारी सुखद परिणाम प्राप्त होंगे।

किसी क्षेत्र विशेष की चमक-दमक से प्रभावित होकर ही उस क्षेत्र में जाना जरूरी नहीं सुफलदाई सिद्ध हो। अनिच्छा से या औरों की इच्छा की पूर्ति के लिए भी किसी क्षेत्र को न अपनाएं। अन्यथा आपके हाथ पछताने के सिवा कुछ नहीं आयेगा। अपनी पसंद के क्षेत्र का चयन कर आगे बढ़ने से आप बेहतर एकाग्रता के साथ अपना काम कर पायेंगे।

एकाग्रता और लगन की भूमिका लक्ष्य प्राप्ति में बहुत महत्वपूर्ण होती है। इनके अभाव में पिछड़ जायेंगे। मन को भटकने से रोकने और सही दिशा में लगाए रखने का प्रयास जारी रहना ही चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि आप बार-बार सफलता पा लेने के बाद मिलने वाली ख़ुशी के बारे में भी सोचते रहें। सो आशावादी बने रहकर अपने काम में पूरी ईमानदारी के साथ जुटे रहें।

विशेष रूप से सुबह का समय यूँ ही न गंवाएं। देर रात तक पढ़ना या काम करना और सुबह देर से उठना ठीक नहीं, हाँ कभी परिस्थितिवश ऐसा करना पड़े तो बात और है। अपनी दिनचर्या को समय विभाजन कर लिखें, उसी के अनुसार चलें। रोजाना सुबह घूमना, व्यायाम-योग करना, सही खानपान (यथासंभव शाकाहारी), सही ढंग से बैठना, क्रोध-ईर्ष्या-बुराई-झूठ से बचना, सभी से अच्छा व्यवहार करना आदि जैसी बातें भी लक्ष्य प्राप्ति में पर्याप्त सहायक सिद्ध होती है।

कभी अनेक विषयों को मिलाएं नहीं। यदि आपके सामने विषय 'क' है तो 'ख' की ओर न जाएँ। अन्यथा आप न 'क' पर और न ही 'ख' पर ध्यान केन्द्रित कर पाएंगे। इससे आपकी एकाग्रता और लगन में भी बाधा आयेगी। विषय और समय का निर्धारण अपनी जरूरत के अनुसार करें और अपने कार्यक्रम का पालन भी करें। रोजाना पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार चलाने से राह और आसान हो जायेगी। एक खास बात और, कभी अपना और दूसरों का समय बरबाद करने वाले लोगों से सदा सावधान और बचकर रहें। प्रतिदिन देश-दुनिया के बारे में से खुद को जोड़े रखें, यह कार्य थोड़ा समय देकर आसानी से किया जा सकता है जो अनेक प्रकार से काम का सिद्ध होता है।

* ता. च. चन्दर

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