लोड हो रहा है. . .

युवाउमंग में पढ़िए

सोमवार, 26 मई 2008

खानपान


गर्मी के मौसम में अपनाएं गुणकारी शर्बत

गर्मी के मौसम के दस्तक देने से पहले ही शीतल पेय निर्माता विशेष रूप से बच्चों की कोमल भावनाओं को ध्यान में रखकर कुटिलतापूर्ण विज्ञापन अभियान शुरू कर देते हैं। इन विज्ञापन अभियानों को लुभावना और प्रभावशाली बनाने के लिए मुहमांगी कीमत पर लोकप्रिय फिल्मी सितारों या क्रिकेट खिलाड़ियों को अनुबन्धित कर लेते हैं। धन के लालच के वशीभूत ये लोकप्रिय हस्तियां अपनी लोकप्रियता को भुनाते हुए लोगों की भावनाओं का शोषण करती हैं। वे अपने इस कुकृत्य से देशवासियों और देश का बहुत बड़ा नुकसान करते हैं, वह भी पूरे होशोहवास में और सोचसमझकर।

भारीभरकम विज्ञापन बजट वाले गैर जरूरी तथाकथित तूफानी ठण्डे पेयों के लुभावने और हमारा स्टेटस तय करने वाले प्रिंट तथा इलैक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से पेश किए जाने वाले विज्ञापन अभियानों ने बहुत नुकसान किया है। दूषित और हानिकारक रासायनिक पदार्थों से तैयार किए गये अनेक शीतल पेय बाजार में टिके रहने के लिए भारी मारामारी कर रहे हैं। लोग झूठी छवि और आधुनिक दिखने के फेर में भ्रमित हो इन घटिया शीतल पेयों को मुंह से लगाए हुए हैं। यहां के लोगों को अपने रहस्यमय फार्मूलों से तैयार किये गए शीतल पेयों का आदी बनाने में अनेक भारतीय और बहुराष्ट्रीय कम्पनियां एकदूसरे से होड़ में लगी हुई हैं। इस होड़ का बच्चे आसान शिकार हो रहे हैं जबकि ये शीतल पेय बच्चों की हड्डियों, सम्पूर्ण स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक विकास की दृष्टि से हितकर नहीं हैं।
अपने-अपने शीतल पेयों का बाजार बढ़ाने में जुटी इन कम्पनियों का जन स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं है और न ही सरकार को इससे कुछ लेनादेना है। हमें ही इस मामले में पहल कर अपना और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सही कदम उठाने की पहल करनी चाहिए। इन हानिकारक पेयों का उपयोग स्वयं एकदम बन्द करते हए बच्चों को भी प्रेरित करना होगा। दावतों में इनके उपयोग से विशेष रूप से बचना होगा। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले इन शीतल पेयों में उपस्थित कीटनाशकों की बात जाहिर होने पर काफी हंगामा मचा था। दक्षिण भारत में किसानों ने अपनी फसल की कीटों से बचाव के लिए इन्हीं शीतल पेयों का उपयोग किया और इन्हैं काफी कारगर पाया। कीमत की दृष्टि से ये कीटनाशक काफी सस्ते सिद्ध हुए। अनेक लागों ने इन शीतल पेयों का उपयोग अपने घर के शौचालय और स्नानघर साफकर चमकाने में किया और उन्हैं सुखद परिणाम मिले।
दरअसल ये शीतल पेय बर्फ या फ्रिज में रखे जाने के कारण ठंडक का सिर्फ एहसास या भ्रम पैदा करते हैं, वास्तव में किसी भी प्रकार से ये गुणकारी या शरीर को आंतरिक रूप से तरावट, राहत या ठंडक प्रदान करने वाले पेय नहीं हैं। यही नहीं, इनका सेवन करने-कराने के फेर में जेब से भी काफी धन खर्च हो जाता है और वह भी बिना किसी लाभ के। अनेक लोग व्रत-उपवास में इन पेयों का सेवन करते हैं जो ठीक नहीं है। इन शीतल पेयों में घटिया रंग, रसायन आदि का उपयोग किया जाता है, बोतलों की सफाई भी संदिग्ध होती है और निर्माण तिथि का भी सही पता नहीं होता। इन शीतल पेयों में पशुओं की हड्डी, चर्बी, रक्त आदि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कृत्रिम सस्ती मिठास, रंग, कैंसर कारक ब्रोमिनेटेड वेजीटेबल ओयल (बी.वी.ओ.) आदि के चलते ये पेय किसी भी स्थिति में मानव के लिए निरापद नहीं कहे जा सकते। कुछ समय पहले हमारे देश में बी.वी.ओ. को लेकर काफी शोर मचा था। सरकार ने इसके प्रयोग पर रोक भी लगा दी थी पर हमारे यहां भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुस्ती के चलते कुछ भी चलता रह सकता है। आम आदमी के पास खा़ पदार्थों की जोच-पड़ताल का कोई तरीका ही नहीं है इस प्रकार इन पेयों पर रत्तीभर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। शीतल पेय निर्माता अपने असीमित लाभ की खतिर कुछ भी कर सकते हैं और वे सक्षम हैं।
गर्मी के मौसम के दस्तक देने से पहले ही शीतल पेय निर्माता विशेष रूप से बच्चों की कोमल भावनाओं को ध्यान में रखकर कुटिलतापूर्ण विज्ञापन अभियान शुरू कर देते हैं। इन विज्ञापन अभियानों को लुभावना और प्रभावशाली बनाने के लिए मुहमांगी कीमत पर लोकप्रिय फिल्मी सितारों या क्रिकेट खिलाड़ियों को अनुबन्धित कर लेते हैं। धन के लालच के वशीभूत ये लोकप्रिय हस्तियां अपनी लोकप्रियता को भुनाते हुए लोगों की भावनाओं का शोषण करती हैं। वे अपने इस कुकृत्य से देशवासियों और देश का बहुत बड़ा नुकसान करते हैं, वह भी पूरे होशोहवास में और सोचसमझकर।
अब हमें स्वयं अपना और अपने नौनिहालों के हित को ध्यान में रखते हुए सही तरीका अपनाना चहिए जिससे हमारी जेब भी हलकी न हो और गुणकारी शीतल पेयों के उपयोग से स्वास्थ्य को लाभ भी मिले। घर या बाहर रहते हुए हम ऐसे शीतल पेय अपना सकते हैं जो मूल्य की दृष्टि से मंहगे नहीं पड़ते और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी श्रेष्ठ सिद्ध होते हैं। इनमें से एकाधिक शीतल पेय तैयार किए-कराए जा सकते हैं। ठंडक और ताजगी देने वाले ये पेय आसानी से तैयार हो जाते हैं। कुछ गुणकारी शर्बत या शीतल पेय बनाने की विधियां यहां प्रस्तुत हैं-
नींबू का शर्बत या शिकंजी- आसानी से उपलब्ध नींबू के गुणों से सभी परिचित हैं। मध्यम आकार के पतले छिलके वाले 20 नींबुओं का रस निकालकर उसमें 500 ग्राम मिश्री मिलाकर गाढ़ा होने तक उबालें और ठंडा होने पर कांच की बोतल में भरकर रख दें और आवशयअकतानुसार पानी और बर्फ मिलाकर पिएं-पिलाएं। नींबू की शिकंजी भोजन में अरुचि, मंदाग्नि, उल्टी, पिŸा जनित सिरदर्द आदि में लाभदायक होने के साथ-साथ भूख भी बढ़ाती है।
गुलाब का शर्बत- गुलाबजल या गुलाब की पंखुड़ियोँ से निकाले गये अर्क में मिश्री डालकर उसका पाक बना लें और आवश्याकता पड़ने पर ठंडा पानी मिलाकर पिएं-पिलाएं। यह शर्बत सुगंधित होने के साथ-साथ शरीर की गर्मी को भी नष्ट करता है। गर्मी के मौसम में यह एक अच्छा स्वास्थ्यकर पेय है।
इमली का शर्बत- साफ और अच्छी इमली 1 किग्रा. लेकर 2 लीटर पानी में एक पत्थर या चीनी मिट्टी के बर्तन में 12 घंटे के लिए पतले कपड़ से ढंककर छोड़ दें। फिर इमली को साफ हाथों से मसल-मसलकर पानी के साथ् एकरस कर लें और बीजों को निकाल दें। अब स्टेनलैस स्टील के बर्तन में छानकर उबाल आने तक गर्म करें। इसके बाद 750 ग्राम चीनी डाल दें। 3 तार की चाशनी बनने पर आग से उतार कर ठंडी होने दें। इसे चौड़े मुंह की कांच की बोतल या बर्तन में भरकर रख दें। आवश्यकता होने पर उपयुक्त मात्रा लेकर उसमें ठंडा पानी और बर्फ मिलाकर उपयोग में लाएं।
यह शर्बत कब्ज और पित्त में लाभ पहुंचाता है। गर्मी के दिनों में सुबह पीने से लू लगने का डर नहीं रहता।
इमली की ही तरह कैथ (कबीट) का शर्बत भी बनाया जा सकता है। यह शर्बत शरीर की गर्मी, पित्त शामक और रुचिकर होता है।
मुनक्का का शर्बत- मुनक्के 250 ग्राम मात्रा में लेकर उनके बीज निकाल लें और नींबू या बिजौरे (बड़े खट्टे नींबू) के रस में पीस लें। उसमें लगभग 100 मिली. अनार का रस मिला दें। अब उसमें स्वादानुसार काला नमक, पिसी इलायची, पिसी काली मिर्च, भुना पिसा जीरा, थोड़ी पिसी दालचीनी व अजवायन डालकर उसमें 200-250 ग्राम शहद भलीभांति मिला दें। आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर उपयोग में लाएं।
यह शर्बत मंदाग्नि और अरुचि में अत्यंत गुणकारी होता है।
कच्चे आम का शर्बत या पना- पना बनाने के लिए कच्चे आम या अमिया छीलकर पानी में उबाल लें फिर ठंडे पानी में अमिया मसलकर एकसार कर लें। इसमें स्वादानुसार काला नमक, सादा नमक, भुना पिसा जीरा और चीनी मिलाकर पिएं। इसमें कुटी बर्फ मिलाई जा सकती है। गर्मी से राहत दिलाने वाला यह शर्बत स्वास्थ्य के लिए गुणकारी और बढ़िया पेय है। यह प्रचीन भारतीय परम्परागत स्वादिष्ट पेय है।
अनार का शर्बत- अच्छी तरह पके 20 अनारों के दाने निकालकर उनका रस निकाल लें। इस रस में 50-60 ग्राम कद्दूकस किया हुआ अदरक मिलाकर उबाल लें। चाहें तो इसमें थोड़ी चीनी मिला लें। गाढ़ा होने पर उसमें 3-4 पिसी इलायची और थोड़ी-सी केसर मिलाकर कांच की शीशी में भरकर रख लें और आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी व कुटी बर्फ मिलाकर पिएं-पिलाएं। यह शर्बत पित्त नाशक होता है अतः दवा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। गर्मी के मौसम में यह काफी राहत देता है।

लस्सी- ताजा दही में स्वादानुसार चीनी, ठंडा पानी, कुटी बर्फ, पिसी इलायची या गुलाब जल या कुवड़ा या किसी बोतलबन्द शर्बत की कुछ बूंदें मिलाकर लस्सी बनाकर पिएं-पिलाएं। इसमें चाहें तो थोड़ा दूध भी मिला सकते हैं। मीठी लस्सी की ही भांति नमकीन लस्सी भी बनाई जा सकती है। ताजा दही लेकर उसमें स्वादानुसार थोड़ सादा नमक, काला नमक, भुना पिसा जीरा, कुटी बर्फ और उपलब्ध हो तो कुछ पोदीने की हरी या सूखी पत्तियां पीसकर डाल दें। थोड़ी पिसी काली मिर्च भी डाली जा सकती है। शानदार स्वादिष्ट और गुणकारी पेय यानी लस्सी तैयार है। यह लस्सी शरीर में उत्पन्न अतिरिक्त गर्मी को नियन्त्रित करती है। लस्सी पीने के बाद कुछ देर तक पानी नहीं पीना चाहिए।
दूध का शर्बत थोड़े दूध में जरा सी पिसी या साबुत सौंफ उबाल लें। उसमें और दूध तथा पानी मिलाकर सही मात्रा में चीनी डालकर मिला लें। अब इसे छान लें और कुटी बर्फ डालकर पियें-पिलाएं।
बराबर मात्रा में दूध और पानी लेकर उसमें मिश्री या शहद मिलाकर बनाया शर्बत पिएं-पिलाएं। इससे शरीर को पर्याप्त राहत मिलती है। जो लोग गर्मी के मौसम में भी दिन में कई बार चाय पीने के शौकीन हैं उनके लिए यह पेय आदर्श है।

सत्तू- गेहूँ, चना, चावल और जौ को बराबर मात्रा में सेंककर या भुनवाकर पीसकर एक साफ बरतन या मर्तवान में भरकर ढंककर रख लें। गर्मी की दोपहर में एक-दो चम्मच यह सत्तू लेकर उसमें पानी या दूध और मिश्री या चीनी मिलाकर ठंडा करके या बर्फ डालकर पिएं। सत्तू के सेवन से थकावट दूर होती है, ताजगी और शक्ति मिलती है। सत्तू का उपयोग भोजन के 2 घंटे पहले या बाद ही करना चाहिए। सत्तू को पतला बनाकर पीना ही अच्छा होता है। इसका अधिक मात्रा में और रात के समय सेवन करना आयुर्वेद के अनुसार ठीक नहीं।
इसी प्रकार आम, तरबूज, खरबूज, बेल, अंगूर आदि ताजा फलों को पानी में मसलकर या उनके रस भी शीतल पेय के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं।
अब इस गर्मी के मौसम में बोतलबन्द घातक कार्बोनेटेड नकली शीतल पेयों को और अपनाइए अपनी सुविधानुसार पारम्परिक स्वास्थ्यप्रद देशी पेय। हमारे ये पेय हर जेब के अनुकूल होने के साथ-साथ स्वाद के मामले में भी बेजोड़ हैं।

टी सी चन्दर/www.prabhasakshi.com

1 टिप्पणी:

युवाउमंग