युवाउमंग में पढ़िए

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2008

तकनीक

बचिए हैकिंग के शिकार होने से
हैकिंग से बचने के लिए उपयोक्ता को स्वयं ही सावधान रहने की जरूरत है। साथ ही इसके लिए हर स्तर पर सावधानी बरतना आवश्यक है। स्कूल-कालेजों में सिक्योरिटी नार्म्स को अपनाया जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के अलावा सरकार द्वारा अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठाया जाना भी जरूरी है।
इन्टरनेट की लोकप्रियता और आवश्यकता निरन्तर बढ़ रही है। इस आधुनिक और त्वरित गति तकनीक के साथ-साथ कुछ खतरे तथा परेशानियां भी बढ़ गयीं हैं। सूचना, ज्ञान और जानकारी के अथाह भंडार को हम अलादीन के चिराग की उपमा सहज ही दे सकते हैं। कुछ बटन दबाते ही मनचाहा विवरण हमारे सामने होता है जिसे हम सहेज कर रख सकते हैं या उसका प्रिन्ट ले सकते हैं और जिसका आवश्यकतानुसार उपयोग कर सकते हैं।
अनगिनत युवा नेट सर्फिंग और चैटिंग करते हैं। इस आधुनिक तकनीक ने मनोरंजन, गपशप और देश-विदेश में दोस्त बनाना भी बेहद आसान बना दिया है। अधिकांश किशोर और युवा विपरीत लिंगी से (भले ही वे एक दूसरे से झूठ बोल रहे हों) मैत्री कर जमकर चैटिंग का आनन्द लेते हैं। इस नयी पीढ़ी के तमाम लोगों के लिए चैटिंग दिचर्या का ही अंग बन गयी है।
सर्फिंग और चैटिंग हैकिंग के चलते कभी भी परेशानी का कारण बन सकते हैं। आजकल हैकिंग का जोर काफी बढ़ रहा है। नयी तकनीक की जानकारी रखने वाले किसी भी शरारती या शातिर दिमाग वाले व्यक्ति के लिए हैकिंग बहुत आसान कार्य है। हैकिंग के लिए किसी विशेष योग्यता या क्षमता की आवश्यकता नहीं होती।
हैकिंग करने वाले को हैकर कहा जाता है। हैकर की पहुंच दूसरों के निजी ई-मेल और फाइलों तक सहज ही हो जाती है। सर्फिंग के दौरान हाऊ टू डू गाइड्स, आटोमटेड टूल्स आदि के कारण यह कार्य मुश्किल नहीं रह जाता। भले ही ज्यादातर किशोर और युवा मजे के लिए ही हैकिंग कर हैकर बनते हैं पर हैकिंग का कार्य एक साइबर अपराध है।
आईटी एक्ट के अनुसार किसी के निजी ई-मेल पढ़ना एक अपराध है। हांलाकि व्यावसायिक प्रतिस्पर्द्धा के चलते हैकिंग कार्पोरेट जगत में एक व्यवस्थित अपराध बन गयी है। हैकरों को 2 नामों से जाना जाता है-व्हाइट हैट और ब्लैक हैट हैकर। बड़ी-बड़ी कम्पनियां अपने सुरक्षा तन्त्र को मजबूत बनाये रखने के लिए एथिकल एक्सपर्ट व्हाइट हैट हैकर नियुक्त करती हैं। ये किसी साइबर अपराध में शामिल नहीं होते अपितु साइबर अपराधों का पता लगाने और उनकी रोकथाम में मदद करते हैं। ज्यादातर मामलों में उत्सुकता और कुछ करके देखने के मजे लेने की इच्छा के कारण किशोर और युवा जाने-अनजाने इस अपराध कर्म के सहयोगी बन जाते हैं।
किशोर और युवा वर्ग हैकिंग का स्वयं आसानी से शिकार बन जाता है। हैकिंग के क्षेत्र के उस्ताद तरह-तरह के प्रलोभन से किशोर और युवा वर्ग को अपने जाल में फंसाते हैं। गेमिंग और चैटिंग आज के बहुत आकर्षक क्षेत्र हैं। एक अन्य आकर्षण है पोर्न साइट्स। इन साइट्स के होम पेज व कुछ अन्य हिस्सों में दी गयी सामग्री, चित्रों या वीडियो क्लिपिंग को देखकर किशोर और युवा ही नहीं बड़े भी कुछ और देखने के लिए इनके आकर्षण में फंस जाते हैं। इन साइट्स की सदस्यता के बहाने लोगों से अन्य विवरण के साथ-साथ क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते आदि के बारे में आवश्यक जानकारी भी प्राप्त कर ली जाती है। चैटिंग के जरिए भी हैकर चैट रूम में प्रवेश कर उपयोक्ता को धीरे-धीरे विश्वास में लेकर अपने काम की जानकारी ले लेते हैं। इस जानकारी का उपयोग हैकर अपने हित में और उपयोक्ता को नुकसान पहुंचाने के लिए करते हैं।
हैकिंग से बचने के लिए उपयोक्ता को स्वयं ही सावधान रहने की जरूरत है। साथ ही इसके लिए हर स्तर पर सावधानी बरतना आवश्यक है। स्कूल-कालेजों में सिक्योरिटी नार्म्स को अपनाया जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के अलावा सरकार द्वारा अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठाया जाना भी जरूरी है। उपयोक्ता और अभिभावकों को भी सावधान रहने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के द्वारा की गयी नेट सर्फिंग पर नजर रखना चाहिए। हालांकि साइबर कैफे आदि के उपयोग को देखते ऐसा कर पाना काफी मुश्किल है। इन्टरनेट के तेजी से होते प्रसार और अच्छी बैंडविड्थ की सुविधा ने निःसंदेह जागरूक अभिभावकों के माथे पर पिंता की एक और लकीर बढ़ा दी है।
महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आज के भागमभाग के समय में अधिकांश सक्षम अभिभावकों के पास बच्चों की आर्थिक जरूरतों की पूर्ति के अलावा उनके लिए समय ही नहीं है। कम से कम इतना तो किया ही जा सकता है कि इंटरनेट पर महत्वपूर्ण निजी जानकारियां, फोटो आदि, जिनसे कोई आपको आर्थिक हानि पहुंचा सके या ब्लैमेल कर सके, देने से बचना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की नेट सर्फिंग पर नजर रखें। नियमित रूप से सर्फिंग के दौरान विजिट की गयी साइट्स की जांच करते रहना चाहिए। हैकिंग के बारे में बताते हुए उन्हें सावधान रहने की हिदायत देना भी जरूरी है।
हैकिंग से बचने के लिए बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी प्रशिक्षित किया जाना जरूरी हो गया है। हैकिंग के विरुद्ध आवश्यक कानून बनाने की भी जरूरत है। हैकर की पहचान करना साइबर क्राइम विशेषज्ञों के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है पर इस अपराध के लिए बड़ी सजा का प्रावधान नहीं है। विशेष रूप से अवयस्क हैकिंग अपराधियों को चेतावनी और मामूली सजा दी जाती है।
टी.सी. चन्दर

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी सूचना है लिखते रहिये।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आभार इस जानकारी के लिए\\.

    इसे देखियेगा जरा:

    http://udantashtari.blogspot.com/2008/04/blog-post_21.html

    थोड़ा जरुरी है इस पर गौर करना.

    उत्तर देंहटाएं

युवाउमंग