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रविवार, 13 अप्रैल 2008

करियर Career

माडलिंग के क्षेत्र में है ग्लैमर और पैसा भी
मेहनत, लगन, आत्मविश्वास, दृढ़निश्चय आदि के साथ अपने काम में जुट जाना ही अच्छे परिणाम देगा। माडलिंग के क्षेत्र में आय का कोई निश्चित पैमाना नहीं है। किसी माडल की आय उसकी लोकप्रियता, मांग और विज्ञापन के बजट पर निर्भर करती है। यों सक्रिय माडलों की आय काफी अच्छी होती है पर निश्चित नहीं होती। यह आय काम, मांग और उसके स्तर के अनुसार कुछ सौ रुपयों से लेकर हजारों या लाखों रुपये तक हो सकती है।
माडलिंग का नाम आते ही तमाम लोकप्रिय और सुन्दर चेहरे आंखों के आगे तैर जाते हैं। पहले अखबार-पत्रिकाओं, बोर्ड-होर्डिंग, पोस्टर, सिनेमा के पर्दे वगैरह पर विज्ञापनों में विभिन्न उत्पाद, सेवाओं या संदेशों के साथ आवश्यकतानुसार माडलों का उपयोग किया जाता रहा है। पर अब बदले समय के साथ प्रचार माध्यमों और उनके उपयोग में भी भारी बदलाव आया है। किसी उत्पाद के प्रचार और उसकी बिक्री बढ़ाने में विभिन्न प्रकार के विज्ञापनों का अपना विशेष योगदान होता है और सही माडल का भी। मशहूर और आकर्षक माडल लोगों या संभावित ग्राहकों का ध्यान सहज ही ध्यान आकर्षित करते हैं। बिना विज्ञापन के आज किसी उत्पाद के प्रचार और उसकी बिक्री को बढ़ाना असंभव सा है।
किसी उत्पाद या सेवा की लोगों में मांग पैदा कर उसकी बिक्री बढ़ाना या उसे लोकप्रिय बनाना किसी विज्ञापन का पहला उद्देश्य होता है। फैशन शो, टीवी और उस पर केबल या डिश के माध्यम से दिखाये जा रहे देश-विदेश की विभिन्न भाषाओं के समाचार, मनोरंजन, धार्मिक, गीत-संगीत, जानकारी, फैशन, जीवनशैली, खेल, फिल्म आदि से जुड़े चैनलों में रोजाना ढेरों विज्ञापन दिखाये जाते हैं। इन विज्ञापनों में विभिन्न आयु वर्गों के तमाम माडल भी दिखाये जाते हैं। कोई भी विज्ञापन बिना उपयुक्त माडल के अधूरा है। विभिन्न उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयुक्त होने वाले विज्ञापन माध्यमों के प्रसार के साथ ही विज्ञापन और माडलों की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है।
किसी उत्पाद का उत्पादक लोगों के पास सीधे नहीं पहुंच सकता। उसे विज्ञापन माध्यमों का सहारा लेना ही पड़ता है और विज्ञापनों में उपयुक्त माडल का उपयोग करना भी उतना ही जरूरी हो जाता है। प्रायः जानेमाने या मशहूर माडल या माडल के रूप में अनेक खिलाड़ी, अभिनेता-अभिनेत्रियां और कभी-कभी खास हस्तियां भी विज्ञापनों में दिखायी देती हैं। विज्ञापन एजेंसियां और उत्पादक बड़ी चतुराई से उस माडल बनाये गये व्यक्ति के गुणों, विशेषता या प्रसिद्धि का अपने हित में उपयोग करते हैं। एक कुशल माडल अपने माडल हावभाव, आकर्षक पहनावे, बातों और अभिनय के माध्यम से सम्बन्धित उत्पाद को लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं और उसे खरीदने को प्रेरित करते हैं। ऐसा लगता है जैसे वे उस उत्पाद के बारे में बिलकुल सच कह रहे हैं।
जहां विज्ञापन जगत में कुछ चेहरे लम्बे समय तक धूम मचाये रहते हैं, वहीं कुछ चेहरे थोड़े समय के बाद ही गायब भी हो जाते हैं। कुछ अपवादों को छोड़ माडलिंग की दुनिया में चेहरे प्रायः स्थाई नहीं होते। नये-नये चेहरे आते रहते हैं। जानेमाने क्रिकेट खिलाड़ियों और फिल्म-टीवी अभिनेता-अभिनेत्रियों, संगीतज्ञों का माडलिंग के क्षेत्र में लम्बे समय से महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है। मशहूर हस्तियां माडलिंग के क्षेत्र में अपनी शर्तों पर सक्रिय होकर और अधिक नाम और दाम कमा रहे हैं।
माडलिंग का व्यवसाय लोकप्रियता के साथ-साथ धन कमाने का बेहतर पर कड़ी प्रतियोगिता वाला क्षेत्र है। एक अच्छा माडल सफल होने के साथ ही जीवन के कई क्षेत्रों में आगे बढ़ जाता है। आज के अनगिनत युवक-युवतियां माडलिंग के क्षेत्र में अपना कॅरियर तलाश करने को सक्रिय हैं। यह जानते हुए भी कि इस क्षेत्र में प्रायः एक माडल का जीवन अधिक लम्बा नहीं होता, इस क्षेत्र को अपनाने की ललक युवाओं में बढ़ती ही जा रही है।
इस क्षेत्र में भाग्य आजमाने के लिए विशेष शैक्षिक योग्यता की आवश्यकता नहीं पड़ती सो पढ़ाई में अधिक सिरखपाई की जरूरत नहीं। उच्च शिक्षा प्राप्त किये बिना भी इस क्षेत्र में कदम बढ़ाया जा सकता है। हां, अनेक क्षेत्रों की भांति यहां भी अंग्रेजी भाषा बोलना-समझना और सामान्य ज्ञान उपयोगी सिद्ध होता है। माडलिंग के लिए किसी खास योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। विज्ञापनों में काम करने के लिए नवजात से लेकर बुजुर्ग तक हर प्रकार के माडल की आवश्यकता पड़ती है। बच्चे, बूढ़े, युवा, किशोर, महिला, पुरुष आदि सभी माडल के रूप में काम कर सकते हैं। यह सच नहीं कि सुन्दर, सुडौल, गोरे, आकर्षक आदि गुण-विशेषताओं वाले लोग ही माडल बन सकते हैं। ऐसे अनेक माडल हैं जो सामान्य चेहरे, कद-काठी के स्वामी हैं पर वे लगातार काम कर रहे हैं। किसी माडल के लिए सौंदर्य सम्बन्धी कोई विशेष मानदण्ड नहीं अपनाये जाते। उसका चेहरा फोटो जनिक होना चाहिए। प्रायः ऐसा होता है कि वास्तविक जीवन में सुन्दर और आकर्षक दिखने वाले व्यक्ति का चेहरा फोटों में ठीक नहीं आता और साधारण दिखने वाले व्यक्ति का चेहरा फोटो में आकर्षक दिखता है।
आमतौर पर मासूम और आकर्षक चेहरा, शरीर की सही संतुलित बनावट, परिश्रम, सामान्य या अच्छी लम्बाई, अच्छा स्वास्थ्य, आकर्षक मुसकान, चुस्तीफुर्ती, समय की पाबन्दी, व्यवहार कुशलता, नम्रता, आत्मविश्वास आदि गुण-विशेषताओं वाले लोग माडलिंग के क्षेत्र में सफलता की अपनी राह आसानी से बना लेते हैं। खुले विचारों वाले लोगों को इस क्षेत्र में पसन्द किया जाता है। अन्य क्षेत्रों की भांति इस क्षेत्र में आने, जमने और जमे रहने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। अपने शरीर को संतुलित बनाये रखने के लिए सही खानपान पर ध्यान देने के अलावा नियमित रूप से योग, व्यायाम, प्राणायाम आदि करना भी जरूरी है। आकर्षक दिखने के लिए विशेषज्ञों की राय भी अपनानी चाहिए। मनमोहक हावभाव, चाल-ढाल, साजसंवार आदि के लिए आवश्यक हो तो योग्य व अनुभवी लोगों से उपयुक्त प्रशिक्षण लेकर अभ्यास भी करना चाहिए।
आजकल महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी अनेक विज्ञापन एजेन्सियां कार्यरत हैं। प्रायः हर विज्ञापन में विज्ञापन एजेन्सी और विज्ञापनदाता की पसन्द के माडल की आवश्यकता होती है। माडलों की आवश्यकता के लिए कभी-कभी पत्र-पत्रिकाओं में विज्ञापन भी छपते हैं। आमतौर पर माडल बनने के इच्छुक स्वयं विज्ञापन एजेन्सी से या माडल सप्लाई करने वाली एजेन्सी से सम्पर्क करते हैं। ‘माडल’ को अपना पोर्टफोलियो बनवाना पड़ता है। इसके लिए कुछ हजार रुपये खर्च भी करने पड़ते हैं। इच्छुक व्यक्ति की फोटो पसन्द आने पर विज्ञापन एजेन्सी फोटो सेशन के लिए भी बुलाती है जिसके लिए आवश्यक तय शुल्क भी देना पड़ सकता है। चयन किये जाने पर उम्मीदवार का नाम उस एजेन्सी की सूची में शामिल कर लिया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर उस व्यक्ति को बुला लिया जाता है।
कई बार विज्ञापन एजेन्सियों के कर्ताधर्ता, एजेन्ट और कभी-कभी विज्ञापनदाता भी सड़क-चैराहे, विभिन्न कार्यक्रम या सार्वजनिक स्थानों पर भी अपने माडल की तलाश में रहते हैं। माडलिंग के क्षेत्र में कदम रखने के लिए बहुतायात में छप रही पत्र-पत्रिकाएं एक अच्छा माध्यम सिद्ध हो सकती हैं। इनमें विभिन्न विषयों पर छपने वाले लेख-कहानियों आदि को सजीव और सचित्र बनाने के लिए भी माडलों का उपयोग किया जाता है। आजकल अनेक टीवी चैनल किसी विशेष समाचार या प्रसंग को नाट्य रूपांतर कर दिखाने में माडलों के अभिनय का उपयोग कर रहे हैं। इस प्रकार की माडलिंग अपेक्षाकृत अधिक सरल होती है। इसके लिए पत्र-पत्रिकाओं के फोटोग्राफरों के सम्पर्क में भी रहना चाहिए।
मेहनत, लगन, आत्मविश्वास, दृढ़निश्चय आदि के साथ अपने काम में जुट जाना ही अच्छे परिणाम देगा। माडलिंग के क्षेत्र में आय का कोई निश्चित पैमाना नहीं है। किसी माडल की आय उसकी लोकप्रियता, मांग और विज्ञापन के बजट पर निर्भर करती है। यों सक्रिय माडलों की आय काफी अच्छी होती है पर निश्चित नहीं होती। यह आय काम, मांग और उसके स्तर के अनुसार कुछ सौ रुपयों से लेकर हजारों या लाखों रुपये तक हो सकती है। एक माडल के लिए उसका लोकप्रिय होना भी जरूरी है।
अनेक ऐसे नाम भी हैं जिन्होंने माडलिंग की दुनिया से फिल्मों और टीवी सीरियल और एंकरिंग के क्षेत्र में छलांग लगायी है और इनमें से अनेक सफल भी हुए हैं। माडलिंग के क्षेत्र में पर्याप्त लोकप्रियता प्राप्त करने के बाद भी कोई माडल लम्बे समय तक प्रायः नहीं रह पाता। नित नये चेहरे इस क्षेत्र में आते रहते हैं। अतः एक माडल को काफी समझदारी के साथ काम करना चाहिए और दूरदर्शी बनकर अपने भविष्य को सदा ध्यान में रखना चाहिए।
बाजार से हटने के साथ ही रोजगार के उचित विकल्प को ध्यान में रखना चाहिए। किसी एजेन्सी, प्रतिष्ठान आदि में नौकरी की जा सकती है और अपने अनुभव के आधार पर नये माडलों के लिए प्रशिक्षण संस्थान खोला जा सकता है। अभिनय का क्षेत्र भी अपनाया जा सकता है जहां लम्बे समय तक टिका जा सकता है। इस क्षेत्र में अच्छे सम्पर्क बनाये रखना बहुत काम आता है। अपने नगर-शहर की विज्ञापन एजेन्सियों से सम्पर्क कर उन्हें अपने बारे में बताना ही इस क्षेत्र में उतरने की दिशा में पहला कदम होगा।
टी.सी. चन्दर/www.prabhasakshi.com
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वीडियो सम्पादन के क्षेत्र में है बेहतर आमदनी

वीडियो सम्पादन के क्षेत्र में कुशल और अनुभवी वीडियो सम्पादक की सदा मांग रह्ती है। वीडियो सम्पादक ही वह व्यक्ति होता है जो कहानी के अनुसार समझदारी से शूट किये या फ़िल्माए गये दृश्यों को सही ढंग से या सिलसिलेवार ढंग से जोड़कर वांछित फ़िल्म बनाता है।

म्प्यूटर का प्रयोग लगभग हर क्षेत्र में प्रमुखता से हो रहा है। नये-नये उपयोगी साफ़्टवेयरों का प्रयोग कर सम्बन्धित कार्य को और बेहतर ढंग से किया जा रहा है। अन्य क्षेत्रों की भांति वीडियो सम्पादन के क्षेत्र में भी कम्प्यूटर का उपयोग खूब किया जा रहा है। किसी विषय को लेकर शूट की गयी फ़िल्म को ऐसे ही प्रस्तुत नहीं किया जाता। हमारे सामने जो फ़िल्म आती है उसके पीछे कुशल सम्पादन की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण होती है।

शूट किये गये दृश्य प्रायः सिलसिलेवार ढंग से नहीं फ़िल्माए जाते। कथा-पटकथा के विभिन्न भागों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर मामलों में आवश्यकता और सुविधानुसार ही दृश्यों को फ़िल्मा लिया जाता है। इसके बाद वीडियो सम्पादन का कार्य शुरू होता है। फ़िल्म निर्माण में जुटे लगभग सभी प्रतिष्ठानों और टीवी चैनलों में अब नान लीनियर सम्पादन सिखाया जाता है।

वीडियो सम्पादन के क्षेत्र में कुशल और अनुभवी वीडियो सम्पादक की सदा मांग रह्ती है। वीडियो सम्पादक ही वह व्यक्ति होता है जो कहानी के अनुसार समझदारी से शूट किये या फ़िल्माए गये दृश्यों को सही ढंग से या सिलसिलेवार ढंग से जोड़कर वांछित फ़िल्म बनाता है। एक वीडियो सम्पादक में आवश्यक तकनीकी जानकारी के अलावा प्रस्तुतिकरण के लिए सौन्दर्यबोध, मल्टीमीडिया, कहानी-दृश्य-गीत-संगीत आदि पहलुओं की उचित समझ होनी चाहिए। केमरा दृश्यों व ध्वनि (साउण्ड इफ़ेक्ट) की पर्याप्त जानकारी इस क्षेत्र में काफ़ी महत्वपूर्ण होती है।
फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ समाचार, मनोरंजन, धर्म-अध्यात्म, शिक्षा आदि अनेक विषयों को लेकर 24 घन्टे चलने वाले टीवी चैनलों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। समाचार-मनोरंजन उद्योग के विस्तार के चलते कुशल वीडियो सम्पादकों की मांग भी बढ़ी है। वीडियो सम्पादन के क्षेत्र में नये-नये और बेहतर क्षमता वाले एडोब, एफ़सीपी, स्मोकन्यूज फ़्लैश, एविड जैसे साफ़्टवेयरों का उपयोग किया जा रहा है।
रोजगार के इओस महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश के लिए उचित प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त करना बहुत जरूरी है। वीडियो सम्पादन के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने के लिए देश के बड़े शहरों में अनेक सरकारी और निजी प्रशिक्षण संस्थान कार्यरत हैं। वीडियो सम्पादन में भविष्य संवारने के लिए 3 से 6 माह अवधि वाले अल्पावधि (शार्ट टर्म) पाठ्यक्रम, एक स्सल अवधि वाले सर्टिफ़िकेट पाठ्यक्रम, 1 से 3 साल अवधि वाले डिप्लोमा पाठ्यक्रम और 3 साल वाले स्नातक (ग्रेजुएट) और स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कहीं भी प्रवेश लेने से पहले सम्बन्धित संस्थान, प्रशिक्षण अवधि, शुल्क आदि के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना हितकर होगा। उल्लेखनीय है कि सभी संस्थानों में लिखित परीक्षा औरे साक्षात्कार के बाद ही सीमित संख्या में प्रवेश दिया जाता है।
प्रशिक्षण संस्थान-
फ़िल्म एण्ड टेलीविजन इन्स्टीट्यूट, ला कालेज रोड, पुणे-411004, फ़ोन: 020-24431817, 24433016, 24433017. सत्यजित रे फ़िल्म एण्ड टेलीविजन इन्स्टीट्यूट, ईएम बाईपास रोड, पीओ पन्चशायर, कोलकाता-700084, फ़ोन: 033- 24328355, 24328356, 24329300. एशियन अकादमी आफ़ टेलीविजन, मारवाह स्टूडियो काम्प्लेक्स, एफ़सी-14/15, फ़िल्म सिटी, नोएडा-201301, फ़ोन: 0120-2515254, 2515255, 251525
टी.सी. चन्दर/प्रभासाक्षी.काम

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